Sunday, 24 March 2024

नृत्य nati

 नृत्य नटी



नई नई पोषाकों के संग

धरती हंसती आती है

लाल लाल पीले फूलांे की

बालों मंे किलिप लगाती है

लहराती है जब अपना आंचल

हरियाली छा जाती है

नृत्य नटी बन ताली दे दे

अपना नृत्य दिखाती है

नयनों मे मादकता भरकर 

काम खिंचा आता है

हरे हरे पीले वस्त्रांे मंे

सजकर प्रकृति रिझाता है

पत्त्ेा देते ताल हवा तब

झूम झूम कर गाती है

उमग उमग कर मंजरिया

धंूघट से बाहर आती हैं।



Monday, 9 October 2023

mukriyan

 मुकरियाँ



नैन चलावे नाच दिखावे

नये रूप घर मोहे रिझावे

बैठे रूप निहारे बीबी

क्यों सखि साजन

ना सखि टी वी



टेर सुनूं तो दौड़ी जाऊँ

वाके ढिंग बैठी बतराऊँ

हूक उठे जो है जाये मौन

क्यों सखि साजन 

ना सखि फोन।


prarthna

 प्रार्थना में बहुत ष्षक्ति है वातावरण निर्मल हो जाता है।हृदय में पवित्रता की भगीरथी बहने लगती है। गायत्री मंत्र जीवन की षक्तिष्है

हजारों दीप जलते हैं मगर क्या बात है साथी

उजाला कैद होता है अंधेरे की सियाही में

जला दो दीप निर्मल ज्योति जिसकी इस तरह चमके

बंधे चांद की राखी ष्षारदा मां की कलाई में ।


Sunday, 8 October 2023

kshanikayen

 ☺क्षणिकाऐं


श्वेत दीवार पर

लालटेन की रोशनी

टाग दी हो खूंटी पर

चादर एक झीनी।



आंगन के कोने में

घूप का टुकड़ा

नील में भिगोयी

सुखायी हो सफेद चादर



द्वार खोलते ही

तीखी सर्द हवा

घुस आयी ऐसे

अनचाहा मेहमान 


काले बादल बीच धवल बादल का टुकड़ा

सघन कंुतल बीच झांकता गोरी का मुखड़ा










Saturday, 7 October 2023

maa

 माँ



सुबह सूरज का उजाला

आंगन में भरने से पहले

आंगन पोछ देती है,

किरणों की उजली चादर

मैली न हो जाए,

माँ

खुद भूखी रहकर

हमारे खाली पेटांे को

भरने का इन्तजाम करती है

तृप्ति भरी आंखो से

सहलाती निहारती है

माँ

दिन चलते दिन चढ़ते जाते

एक एक कर सब बढ़ते जाते

अपने अंधेरे एहसास को,

उजाले से भरने की कोशिश में

और भी अंधेरा करती है

माँ

घुटन से उबरने की चाहत

दीवारों की कैद से

निकल भर जाने की आहट

बेचैन कर देती है पुरुष के,

नफरत की आग में झुलस जाती है

और भी घुट जाती है 

माँ


आंचल के कोने पर आंसू की बूंदों से

अपनी व्यथा लिखती है

उसे उजालों की जरूरत नहीं

अंधेरे कोने में ही कहती है 

मां



Saturday, 18 September 2021

svaym pyaar ho

 

 

Lo;a I;kj gks

 

dHkh rqEgkjs xkyksa ij

xqykc f[kyk djrs Fks

f[kM+dh ij [kM+h

tqUgkbZ esa ugkrh rqe

pkanuh esa ?kqy fey tk;k djrh Fkh

rqEgsa eSa fiz;s dgk djrk Fkk

e/kqj xhr dgk djrk Fkk

 

vc rqEgkjs psgjs ij

voLFkk dh >qfjZ;ka gSa

xys ds Lojksa esa

ljxe esa daiu gS

esjs fy;s rqe

xhr ugha e/kqj jkx gks

vc fiz;s ugha             

                            Lo;a I;kj gksA

Friday, 3 September 2021

रोली हैं बेटियाँ

 

jksyh gSa ;s csfV;kWa

 

v{kr gSa csVs ekFks dk jksyh gSa ;s csfV;kWa

ekFks fryd ltk csVs ds panu yxrh gSa csfV;kWa

czãiq= un gSa csVs rks ;equk lh gSa csfV;kWa

dydy djrh cgrh tk;sa xkWao “kgj gSa csfV;kWa

vkWaxu dh uUgh fpfM+;k ia[kksa okyh gSa ifj;kWa

frryh lh eaMjkrh fQjrh mM+ tkrh gSa csfV;kWa

ik;y daxu [kudkrh dqN iy vkrh csfV;kWa

lwuk lwuk vkWaxu yxrk vxj u vkrha csfV;kWa

lwuh jgs dykbZ HkkbZ dh vxj u cka/ksa jkf[k;kWa

tue fy;k csVh csVs us gqbZ ijkbZ csfV;kWa

csVksa dk rks ?kj gks tkrk nwts ?kj dh csfV;kWa

rqylh ds fcjok lh dsoy vkWaxu ltrh csfV;kWa A

fdruh de gks tkrh mldh ekWa ds ?kj dh jksfV;kWa

tue fy;k D;ksa bl ?kj ls tc tkuh gh gSa csfV;kWa

?kj ls mrj dj p<+ jgha vutku ?kj dh lhf<+;kWa

Ek>/kkj esa Mwcsxh ;k mrjsxh lkxj ikj df”r;kWa

[ksyh firk ds da/ks ij mBrh dgha ls vfFkZ;kWa