Thursday, 25 August 2016

चाँद तारों का

 चाॅंद तारों का धूंधट  सरकने लगा
आसमा से अंधेरा सिमटने लगा।
उनके आने की आहट जरा सी हुई
उनसे मिलने की आशा मचलने लगी
तेरे धुंघरू की रुनझुन जरा सी सुनी
साज लेकर के महफिल थी सजने लगी
तेरे आॅंचल का कोना जरा सा दिखा
हवाओं के तेवर झिझकने लगे
उनके चेहरे  से पर्दा जरा सा हटा
चाॅंदनी की कहानी  बदलने लगी
जुल्फ के तेरे गेसू घनेरे हुए
आॅंख से मेरे बादल छलकने लगा
कोरे कागज पर रखा था इक फूल बस
दिल ने जो कहना था सब कह दिया ।

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