Tuesday, 21 April 2026

shayri

 

ftuds fy;s eSa ej x;k mudk ;g gky gS

bZVsa pqjkdj ys x;k esjs etkj dhA

 

vPNk gqvk 'kckc dk vkye xqtj x;k

bd fnu p<+k gqvk Fkk fQj flj ls mrj x;kA

 

xq: cksyk ;ksa f'k"; ls pfy;ks uSu >qdk;

u tkus fdl eksM+ ij ilZ iM+ks fey tk;A

 

ghjs rks de ugh gS esjs 'kgj esa

vk¡[ksa ij[kus okyksa dh detksj gks xbZ

 

lq[k nq[k esa ;w vaUrj gksrk gS

nq[k dk {k.k {k.k euoUrj gksrk gS

nq[k dg nsus ls FkksM+k de rks

lg ysus ls Nw eUrj gksrk gS

 

gksyh ysdj vkbZ jax vchj Qqgkj

ru eu panu gks x;k Hkwys lc rdjkj  

 

tyh gksfydk vfXu eSa ykus dks ;g ioZ

jax dy'k Nydk jgs gf"kZr eu xU/koZ

 

Qkxqu igus pwujh /kkuh ihyh yky

jax Hkhxs mj ika[kqjh vk¡u mM+s xqyky

 

xqipqi vk¡[kksa esa dgs eq[kM+k jpk vchj

uo laokn lquk jgs <Qyh >kW> eathj

 

Saturday, 21 February 2026

adhunik sita

 आधुनिक सीता

रावण को दिखाकर

कराटे का दांव

अनेक रामयणांे को

जन्म देने से बचाकर

हम छात्र छात्राओं पर

करती है एहसान




अनुभव सिखाता है

ठीक निर्णय लेना

अनुभव आता है

गलत निर्णय लेने के बाद।



असंख्य बादलों में से

एक नन्हा बादल का टुकड़ा

सोचता हुआ

मेरे ही जल से पृथ्वी

हरियाली से भर गई


दरख्तों के काले साये में

झांकता नन्हा सितारा

दुःख भरे जीवन में 

आशा का क्षीण इशारा
















वो मारा



करनी थी हीरोइन को विलेन की ठुकाई

एक ही घूसे में हथेली झनझनाई

हाय, हाय कर बैठ गई

मुझसे नहीं होता, कह ऐंठ गई

देख निर्देशक उसके कान में फुसफसाया

सुनकर भवों पर तनाव आया।

फिर तो हीराइन ने वो शॉट दिये

वास्तविक से लगे सब ओके हुए

ठंाय ठूं ठांय ठूं मुक्के पर मुक्के

लात घूसे चलाये कसके दिये धक्के

सब हो गये इस चमत्कार से दंग

पूछा निर्देशक से क्या, जमाया रंग

कुछ, नहीं हीरोइन को यह बतलाया

समझो पराई औरत मिलकर पति घर आया





Sunday, 24 August 2025

boond ki payal

 ब्ूंाद की पायल


हवा ने बदली के गुलगुली मचाई

खिल खिल खिल बदली खिलखिलाई

बदली की दूध भरी मटकी छलछलाई

धरती ने बूंदों की पायल  बनाई

छम छम छम छम करती इतराई

टप टप टप टप ढोलक  बजाई

फूलों ने रंगभरी चूनर लहराई

बजने लगी डालों की मीठी शहनाई

हवा ने बदली के गुलगुली मचाई 


Sunday, 6 July 2025

Bhagvan yad karate hain

 एक पुजारी जी

एक धर्माधिकारी जी

एक संत चमत्कारी जी

एक मठाधीश महाराज

और पीछे पीछे एक 

बालों में उंगलिया फिराता

 आँखों में लाचारी

चेहरे की बड़ी दाढ़ी

मटमैला कुरतापाजामा

आँखें कहीं और खींचे

पहुँचे चित्रगुप्त के दरबार में

चित्रगुप्त ने दाढ़ी पर हाथ फिराया

अपना चश्मा सरकाया

पुजारीजी को देखा

हाँ आप मंदिर प्रमुख थे

‘हँू ,क्या धर्म का काम किया खुद बतायें 

ईश्वर को कब याद किया?

पुजारीजी मुस्कराये

महाराज भगवान् की तो  करता था सेवा

भगवान् को उठाने से सुलाने तक

उनको खिलाता था मेवा

भक्तों को कराता था दर्शन

मैं और मेरे भगवान् यही मेरा नाता

चित्रगुप्त ने चश्मे से झांका

‘अरे पुजारी भेंट को करता था ताका

किसने चढ़ाया कितना माल

अमीरों को प्रसाद

 गरीबों को देता था टाल

तेरा घ्यान तो रहता था चढ़ावे में

दर्शक को रखता था भुलावे में

चढ़ावे को कहाँ कहाँ छिपाया

भगवान् ने बही में लिखवाया 

एक किनारे खड़ा होजा

मांगना किस्मत में लिखा है

दूतों को किया इशारा

नरक के द्वार पहुँचाओ

आओ धर्माधिकारीजी आप भी

कितनों को धर्म का मार्ग दिखाया

आपका भी  चिट्ठा जाये बताया 

मैं मैं तो धर्मका पालन करता था

आदर्श और धर्म की राह पर चलता था

केवल जपता उसका नाम था

भजन करना मेरा काम था

‘हाँ हर मंदिर में पीछे तेरा कमरा था

जहाँ महिलाओं को धर्म सिखाता था

कहिये  संत चमत्कारी जी

आप तो खुद को भगवान् बताते थे

कृष्ण के रास वाला रूप दोहराते थे

इधर उधर गोपियाँ खड़ी रखते थे

भक्त भगवान् को नहीं उन्हें तकते थे

भगवान् का नाम तो भूल जाते 

उन सुंदरियों में रम जाते

आप रस लेले कर कथा सुनाते

महिलाआंे से चरण दबवाते थे

भगवान् तक भक्त कहाँ पहुँच पाते

आप उनके रास्ते में आ जाते 

आप भी खड़े हो जाइये उस तरफ

अगली महान् आत्मा को आने दो  इस तरफ 

महाराज मठाधीश जी गिड़गिड़ाये

मैं एकतरफ खड़ा हूँ कुछ न बतायें 

हर मंदिर के चढ़ावे में तेरा हिस्सा था

तेरा गद्दा दिन ब दिन ऊँचा उठता था

सब धर्मों को लड़ाना ही तेरा काम था

नफरत फैले तभी तो होता मेरा नाम था

सुनकर मठाधीश लगे काँपने 

रामनामी दुप्पट्टे से लगे मुँह ढाँपने

चित्रगुप्त उनकी पतली हालत देख मुस्कराये 

महाराज मठाधीश जी हाथ जोड़ गिड़गिड़ाये

मैं एक तरफ खड़ा हँू कुछ न आगे बतायें

चित्रगुप्त ने उस दुबले पतले को बुलाया

उसने चित्रगुप्त के साथ अपना चश्मा चढ़ाया

चित्रगुप्त ने बही और शख्स ने डायरी खोली

रुकिये चित्रगुप्तजी घबड़ाये 

अपने दूतों से कहा इन्हें सीधे स्वर्ग पहँुचायें

इनके लिये स्वर्ग से रथ तुरंत मंगवायें

पुजारी संत मठाधीश धर्माधिकारी चकराये

यह तो अदना सा कवि है सहमा सहमा

मूरख प्राणी तुम क्या जानो इनकी महिमा

तुम दर्शकों दर्शन कम अधिक भगाते 

ये अपनी कविता सुनाकर  न जाने

कितनों को भगवान् याद कराते ।



Saturday, 5 July 2025

dhoop pyari bacchi si

    धूप प्यारी बच्ची सी 

भोर होते ही सूरज की बग्घी से 

कूद आती है नन्ही किरन,

गुदगुदाती है मेरे तलुओं को

लिपट जाती है मेरे पैरों से

शैतान बच्ची सी मुझे देखती है 

आ बैठती है मेरी गोदी में 

खिलखिलाती , खेलती , मुस्कराती है

प्यार से सहलाती है

झूल जाती है गले से 

थपथपाती ले लेती है बाहों में

गालों से सटकर बैठ जाती है

भोली बच्ची सी जैसे गुनगुना रही हो 

सुनने लगती हंॅूं उसकी मीठी बातें 

उसके तन की खुशबू से

अंदर तक महक जाता है मन

घोड़ों की टाप ठहरने लगती है 

कूद जाती है पीछे कंधे से 

मुड़कर कहती है फिर कल आउंॅगी 

दादा से सुनी कहानी सुनाउंॅगी 

कल फिर आउंॅगी ।

धूप प्यारी बच्ची सी।

Saturday, 4 January 2025

manjil hai maut

 मंजिल है मौत


हम कहाँ जा रहे है

किधर जा रहे है

मंजिले का पता नहीं

लक्ष्य की खबर नहीं

बस आगे बढ़ने की धुन में

नर्म दूर्वा को रौंदकर

कांटे सजा रहे है

गुलाबों को काटकर

नागफनी लगा रहे है

अब जरूरत नहीं

इस दुनिया में इंसान की

कुर्सी की पूजा है

पूजा नहीं प्रान की

एक का बिन दूजा अधूरा

न सुख न दुःख

न फांसी न सलीब

न विरह न प्रीत

न धनी न गरीब

जीवन के बाद आती हैं

मृत्यु की बलाहटें

इंसानियत जी चुकी

सुनी हैवानियत की आहटें

इंसान दौड़ रहा है

तेजी से भाग रहा है

बड़े, बड़े आविष्कारों से

कहने केा जाग रहा है

परंतु सच बताओ

क्या सच ही वह बढ़ रहा है

या आदिम युग की ओर


लौट कर मुड़ रहा है

ईमानदारी जिंदा है

यह भी खबर है

जो ईमानदार है

बेहद लचर है।

नागफनी के जंगल

बस जंगल रह जायेंगे

चिड़ियों के संगीत की 

चहक नही

महक का पता नही

एक तीखी सी गंध

जीवन में बस जायेगी

कांटे ही कांटे चुभते

रह जायेंगे 

चुभना नियति है

हमारा क्या है हम तो

दुनियाँ से चले जायेंगे

आने वाली पीढ़ी को

मौत के कगार पर बिठा

दुनियाँ में रोशन

नाम तो कर जायेंगे

नाम तो रोशन कर जायेंगे


Wednesday, 17 April 2024

Bhajan1

 

1    dk fnu oa'kh Qsj ctkosxks crk ns oa'kh okys

crk; ns oa'kh ckjs crk; ns uUn nqykjs

vk/kh jkr rd uhan u vkos fQj lius eSa rw rjlkos

vjs dc eks; ikl fcBkosxks crk;

lkl uun esjh g¡lh mM+kos irh esjs ij xqLlk gksos

vjs dc eksdw vk; galkosxks crk; ns

ehjk nj'ku dh gSs I;klh tUe tUe dh rsjh nklh

dc vius pju clkosxks crk; ns

nkl izHkq djs vk'kk rssjh ykt cpkosxks dc esjh

vjs dc eks; vku galkosxks crk; ns